Updated Nov 2, 2025 · v1.1.2
मैं ‘कमलेश काव्य-कुंज’ ग्रंथ को सभी संस्कृति-प्रेमियों को समर्पित करती हूँ।
प्रिय पाठको और सच्चे संस्कृति-प्रेमियो! माँ शारदे की कृपा से, गुरु जोगिंद्र सिंह मलिक के आशीर्वाद स्वरूप और परिवार के सहयोग और दिन-रात की कड़ी मेहनत तैं मैं इस सुंदर कृति ‘कमलेश काव्य कुंज 'की रचना कर पाई हूँ। इस किताब म्ह कुल 25 हरियाणवी किस्से हैं और इसके अलावा सवा सौ से ज्यादा फुटकर रागनियाँ हैं। (कुल 605, शब्दों में कहें तो छह सौ पाँच रचनाएँ हैं इस ग्रंथ में) इस कृति के हरियाणवी किस्सों की विशेषता या कोन्या कि ये एक नारी द्वारा लिखे गए हैं बल्कि इनकी मुख्य विशेषता या है कि यह कृति उन किस्सों तैं सजी-धजी है जिनपै आज तक हरियाणवी म्ह सांग-रागणी शायद ही लिखे गए होंगे। उदाहरण के तौर पै म्हारे अति आदरणीय महान कवियों नै रूप-बसंत, जयमल, चन्द्रकिरण जैसे किस्सों को लिखा और गाया। ये सभी किस्से बेहद सुंदर और शिक्षाप्रद और मनोरंजक हैं। इन पुराणे किस्सों को हम उनके जैसा लिख भी नहीं सकते हैं और एक जैसे विषयों को बार-बार लिखणा संस्कृति के लिए भी शायद ठीक नहीं है। इसलिए मनै उन किस्सों और विषयों को लिया है जो नए कहे जा सकते हैं।
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